कोरोना पर हुए रिसर्च से आई खुशखबरी, भारत में नहीं होगी ज्यादा तबाही!

न्यूयार्क । कोरोना वायरस के कहर से रोकथाम को लेकर तमाम शोध हो रहे हैं । अमेरिकी शोधकर्ताओं ने एक स्टडी में दावा किया है कि जिन देशों में बीसीजी (बैसेलियस कैलमैटे-गुएरिन) वैक्सीन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ है, वहां बाकी देशों के मुकाबले मृत्यु दर छह गुनी कम हुई है।
जॉन्स हॉपकिन्स ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के एक्सपर्ट्स ने यह शोध में निष्कर्ष निकाला है। इन नतीजों को आर्काइव साइट मेडरिक्सिव पर प्रकाशित किया गया है। हेल्थ एक्सपर्ट्स की समीक्षा के बाद इसे मेडिकल जर्नल में प्रकाशित किया जाएगा।
बीसीजी वैक्सीन टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) के खिलाफ रोग प्रतिरोध शक्ति विकसित करती है। टीबी बैक्टीरिया संक्रमण से होता है। शुरुआती ट्रायल में पता चला है कि जिन लोगों ने बीसीजी का टीका लगवाया है, उनका इम्यूनिटी सिस्टम ज्यादा मजबूत होता है और वे दूसरों के मुकाबले संक्रमण के खिलाफ खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं।


उदाहरण के तौर पर, अमेरिकियों पर किए गए एक ट्रायल में बताया गया था कि बचपन में दी गई बीसीजी वैक्सीन टीबी के खिलाफ 60 सालों तक सुरक्षा प्रदान करती है।
यह कहना मुश्किल है कि यह वैक्सीन दूसरे संक्रमणों से कितना बचाती है लेकिन ऐसा हो सकता है कि वैक्सीन से अंदरूनी प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा बेहतर तरीके से काम करती हो।

भारत और अफ्रीकी देशों में बीसीजी का व्यापक इस्तेमाल हुआ है। अगर इस स्टडी के नतीजों पर वैज्ञानिकों की मुहर लग जाती है तो भारत के लिए ये अच्छी खबर मानी जाएगी। हालांकि, बीसीजी वैक्सीन से कोरोना से मृत्यु दर कम होने की बात कही जा रही है लेकिन इससे कोरोना संक्रमण का खतरा खत्म नहीं हो जाएगा।